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मर्यादा

Posted On: 8 Jul, 2014 Others,social issues,Entertainment में

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    आचरण मर्यादित रखना नितांत आवश्यक है. स्त्री एवं पुरुष को स्वयं भगवान ने ही भिन्न बनाया है. हमे भगवान की बनाई प्राकृतिक भिन्नता का सम्मान करना ही होगा. उसने जहाँ एक ओर स्त्रियोचित सौंदर्य बनाया है वहीं दूसरी ओर उसी सौंदर्य के लिए पुरुषोचित तीव्र आकर्षण भी बनाया है.
    जहां पुरुष के लिए मर्यादा का अर्थ इस आकर्षण को मर्यादित करना है, वहीं दूसरी ओर स्त्री के लिए मर्यादा का अर्थ सौंदर्य के अनावश्यक अथवा असंस्कृत प्रदर्शन को मर्यादित करना है.
    पंकज जौहरी


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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
July 9, 2014

बहुत सूक्षम और सारगर्भित लेख आदरणीय.

    johrip के द्वारा
    July 10, 2014

    बहुत धन्यवाद दुबे जी. आप लोगों के इस छोटे से प्रोत्साहन से बहुत बल मिलता है.


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